' पगली ! मुझे 'लाटा ' कहती हो तुम ..सच तो यह है कि तुम भी 'गूंगी ' थी , अपनी बड़े नेत्रों से समय को जाते हुए देखती रही .....चलो एक बात तो अच्छी है ; इतने लंबे अंतराल के बाद अभी भी हम दोनों की याददाश्त ठीक है ;
क्यों !! .... है ना :)
कब लिखी तुमने
कोई कविता
जब करुणा में द्रवित थे तुम
या थे तुम प्रेम में
या थी मैं विप्रलब्धा
और वियोगी से तुम
न मुझे याद है
ना ही तुम्हें
क्या दोनों प्रेम में थे
मैं तुमसे पूछती हूँ ' प्रेम '